जालंधर, पंजाब। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जालंधर में विभिन्न अंबेडकरवादी संगठनों ने इसे भारत के संविधान, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया। इस अवसर पर भारतीय मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा (BM3), सामाजिक इंसाफ कॉन्सिल तथा सतगुरु कबीर टाइगर फोर्स के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उन नौजवानों के संघर्ष की जीत है, जो लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सर्वोपरि होती है और जब युवाओं का संघर्ष सफल होता है, तो यह भारतीय संविधान की ताकत और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत होती है।
वक्ताओं ने कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार, न्याय और सम्मान का अधिकार देता है। यदि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय होता है, तो लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार अब युवाओं की अन्य मांगों पर भी गंभीरता से विचार करेगी।
इस मौके पर संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि वे सामाजिक न्याय, शिक्षा के अधिकार और संविधान की रक्षा के लिए आगे भी शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। साथ ही उन्होंने आंदोलन में शामिल सभी युवाओं को बधाई देते हुए इसे जनशक्ति और संविधान में विश्वास की जीत बताया।

